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Hill Station Nazm

Aug 08 2013

I’m not a big fan of Javed Akhtar’s poetry, but this is one of his best Nazms. Decade long wandering in the Mountains and staying here for last 5 months, I have come to relate quite closely to it as I approach the end of my stay.

Macro shot of rain drops at Simayal Village, Uttarakhand

 

घुल रहा है सारा मंज़र शाम धुंधली हो गयी
चांदनी की चादर ओढ़े हर पहाड़ी सो गयी
वादियों में पेड़ हैं अब नीलगूं परछाइयां
उठ रहा है कोहरा जैसे चांदनी का हो धुंआ

चाँद पिघला तो चट्टानें भी मुलायम हो गयीं
रात की साँसें जो महकी और मद्धम हो गयीं
नर्म है जितनी हवा उतनी फिज़ा खामोश है
टहनियों पर ओस पी के हर कली बेहोश है

मोड़ पर करवट लिए अब ऊंघते हैं रास्ते
दूर कोई गा रहा है जाने किसके वास्ते

ये सुकूं में खोयी वादी नूर की जागीर है
दूधिया परदे के पीछे सुरमई तस्वीर है

धुल गयी है रूह लेकिन दिल को ये एहसास है
ये सुकूं बस चाँद लम्हों को ही मेरे पास है
फासलों की गर्द में ये सादगी खो जाएगी
शहर जाके ज़िन्दगी फिर शहर की हो जाएगी

-जावेद अख्तर

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Comments So Far..
  • raju 12 January, 2014 at 1:45 am

    G! that's way the life goes on. Only that nature's beauty gives us inside deep happiness which becomes our life time treasure and we can overcome from our deep sorrow.Life is about to appreciate what ever you see and get..Extremely special picture of rain drop......om

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  • Dkckvj 8 September, 2017 at 5:31 pm

    Very nice poem

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